ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य और प्रकार

ऑपरेटिंग सिस्टम यह एक तरह का  सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट और प्रोग्राम के बीच interface का कार्य करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कोई भी कंप्यूटर या लैपटॉप काम नहीं कर सकता है यह पूरे सिस्टम को संभालता है। 

 

यह user को एक environment प्रदान करता है ताकि, user अपने कार्य को सुविधाजनक तरीके से कर सके।

 

ऑपरेटिंग सिस्टम user तथा hardware के बीच माध्यम(interface) के रूप में कार्य करता है। या फिर हम कह सकते है OS, user तथा hardware के बीच interact करने का काम करता है। यह सभी प्रक्रियाओं, resource allocation, cpu scheduling, file management, तथा अन्य कार्यों का execution करता है।

 

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?

  • ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास
  • Types of Operating System (OS)
  • मार्केट शेयर के साथ ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण
  • ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार (OS)
  • ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य
  • ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएं (OS)
  • ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करने का लाभ
  • ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करने के नुकसान
  • कर्नेल क्या है?
  • फर्मवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच अंतर
  • 32-बिट और 64 बिट ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच अंतर

 

 

Types of Operating System (OS)

ऑपरेटिंग सिस्टम निम्नलिखित प्रकार के होते है

  • बैच ऑपरेटिंग सिस्टम ( Batch Operating System ) 

  • मल्टीटास्किंग / टाइम शेयरिंग ओएस ( Multitasking/Time Sharing OS )

  • मल्टीप्रोसेसिंग ओएस ( Multiprocessing OS )

  • रियल टाइम ओएस ( Real Time OS )

  • वितरित ओएस ( Distributed OS )

  • नेटवर्क ओएस ( Network OS )

  • मोबाइल ओएस ( Mobile OS )

 

Batch operating system :- Batch operating system में user directly os को कमांड नहीं देता है, जब भी किसी यूजर को कोई काम करना होता है तो वह अपनी जॉब को offline device जैसे punch card जिसे पेपर कार्ड या magnetic कार्ड भी कहा जाता है, उसमें अपनी जॉब या प्रोग्राम ऑपरेटर को submit कर देता। ऑपरेटर यूजर तथा ऑपरेटिंग सिस्टम के बीच का माध्यम है जो बहुत सारे यूजर्स के जॉब को combine करता और फिर एक समान वाले जॉब का अलग – अलग बैच बना देता। जिसे जॉब sorting भी कहते है, वह ऑपरेटिंग सिस्टम को जॉब के बैच को submit कर देता है। उसके बाद ऑपरेटिंग सिस्टम प्रत्येक जॉब को एक एक कर execute करता है।

Batch operating system में एक कार्य को समाप्त होने के बाद ही दूसरे प्रोग्राम का execution करते। और ऐसे में दूसरे प्रोग्राम को execute करने के सीपीयू को wait करना पड़ता, और ऐसे में सीपीयू का काफी समय की खपत होती।  इस ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल 1960 के दशक में किया जाता था। अब इस os का इस्तेमाल बहुत कम होता है।

Multiprogramming operating system :-  batch os को देखते हुए multiprogramming OS को विकसित किया गया। इस OS में कई सारे जॉब या प्रोसेस को मेमोरी में एक साथ लोड कर दिया जाता है। फिर सीपीयू सारे प्रोसेस को एक एक कर execute करता है।

इसमें सीपीयू idle stage में नहीं होता है, यह टाइम का utilize करता है। वैसे सबको लगता है कि multiprogramming os में सीपीयू एक साथ सारे जॉब को execute करता है लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि सीपीयू एक समय में एक ही जॉब को प्रोसेस कर रहा होता है और दूसरे जॉब सीपीयू के लिए प्रतीक्षा कर रहे होते है। सीपीयू एक एक कर  ही सारे जॉब को execute करता है। इसकी कार्य करने की क्षमता बहुत तीव्र होती है।

एक उदाहरण से समझते है-

  • हमारे पास पांच प्रोसेस है p1, p2, p3, p4, p5.
  • OS इसे मेमोरी में एक साथ लोड कर देता है।
  • Multiprogramming os पांचों process को एक queue maintain करता है
  • अब cpu p1 को execute करना शुरू करेगा 
  • बाकि सारे प्रोसेस सीपीयू के लिए wait कर रहे होते है।
  • अगर p1 प्रोसेस अपनी मर्जी से किसी और काम या waiting में चला जाता है, तो सीपीयू p2 प्रोसेस को execute करना शुरू करता है।
  • P1 के वापस आने पर सीपीयू p1 को execute करेगा। और तब तक p2 तथा बाकी प्रोसेस सीपीयू के लिए wait कर रहे होते है।
  • P1 process का execution समाप्त होते ही वह इनपुट आउटपुट device में स्थानांतरण हो जाते है और सीपीयू बड़ी तीव्रता से दूसरे प्रोसेस को execute करता है। P2 का execution समाप्त होते ही p3 को execute करना शुरू करेगा।
  • और ऐसे करके सीपीयू सारे प्रोसेस को एक के बाद एक execute करता है।

Multitasking or time sharing os:

मल्टीटास्किंग या टाइम-शेयरिंग सिस्टम मल्टीप्रोग्रामिंग का logical विस्तार है। इसमें प्रोसेसर सभी प्रोसेस को एक fixed time के लिए ही execute करता है। जिसे  time-sharing भी कहा जाता है।

एक ऑपरेटिंग सिस्टम प्रत्येक प्रोसेस को एक समय के छोटे हिस्से के साथ प्रदान करने के लिए  CPU scheduling और multiprogramming का उपयोग करता है।  इस os में cpu सारे प्रोसेस या टास्क को एक बराबर टाइम response देता है। किसी भी टास्क को ज्यादा wait नहीं करना पड़ता है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम में यूजर को लगता है कि एक समय में कई सारे टास्क execute हो रही है, पर सच तो यही है कि सीपीयू एक समय में एक ही टास्क को execute करता है। क्योंकि इसमें सारे प्रोसेस बहुत तेजी से हो रही होती है।

हम एक उदाहरण से समझते हैं- 

  • सीपीयू के पास एक से ज्यादा प्रोसेस or task है जैसे p1, p2, और p3 है.  तीनों टास्क के लिए 10 सेकंड का  fixed time निर्धारित किया गया है।
  • अब सीपीयू p1 टास्क को execute करना शुरू करता है, यदि 10 सेकंड के बीच इसका execution हो जाता है तो वह exit हो जाएगा, और execution समाप्त नहीं होता है तो वह waiting stage में चला जाएगा। 
  • सीपीयू p2 टास्क को execute करना शुरू करेगा, और 10 सेकंड बाद सीपीयू p3 में स्विच (ट्रांसफर) हो जाएगा और p3  को execute करेगा। 
  • P3 के execution के बाद वह p1 प्रोसेस को execute करेगा फिर p2, उसके बाद p3 और यह प्रोसेस तब तक चलता रहेगा जब तक सारे टास्क का execution समाप्त नहीं हो जाता।

Real Time operating system:- Real time os को short में RTOS भी कहा जाता है। Real time os में किसी भी टास्क को तुरंत (immediately or quickly) response देना होता है। इसमें समय का constant होता है, ऐसे os में समय का delay नहीं होना चाहिए, क्योंकि इस वजह से दुर्घटना भी हो सकती है। इस os का इस्तेमाल उन जगहों पर किया जाता है जहां थोड़े समय में या फिर कुछ समय सीमा के अंदर टास्क को स्वीकार और प्रोसेस किया जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल औद्योगिक(industrial) नियंत्रण, टेलीफोन स्विचिंग उपकरण, उड़ान नियंत्रण जैसे applications में होते है।

यह दो प्रकार के होते है –

  1. Hard real time 
  2. Soft real time 

Hard real time :- इस os के नाम से ही यह प्रतीत होता है कि यह पूरी तरह से strict है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम में टास्क को दिए गए निर्धारित समय में कार्य को पूरा किया जाना चाहिए। अगर इसमें निर्धारित समय में टास्क complete नहीं होता है तो इससे बहुत ज्यादा क्षति  होता है। 

 

Soft real time :- इस ऑपरेटिंग सिस्टम में भी टास्क को निर्धारित समय के अनुसार पूरा करने का  करता है, लेकिन इसमें अगर टास्क को complete करने में थोड़ी लेट भी हो जाए तो इससे कोई दुष्परिणाम नहीं होते है। यह थोड़े कम strict होते है।

 

Distributed operating system :-

 डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जो व्यक्तिगत वर्कस्टेशन के बजाय नेटवर्क पर रहता है।   कंप्यूटर सिस्टम का एक वितरित प्रसंस्करण सिस्टम कई उपयोगकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है जो प्रत्येक उपयोगकर्ता को पूरी तरह कार्यात्मक कंप्यूटर प्रदान करता है।

व्यक्तिगत कंप्यूटिंग में, वितरित प्रसंस्करण स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क (LANs) का रूप ले लेता है,

जिसमें किसी विभाग या संगठन के सदस्यों के व्यक्तिगत कंप्यूटर हाई-स्पीड केबल कनेक्शन से जुड़े होते हैं।  वितरित प्रसंस्करण मल्टीसियर सिस्टम पर कुछ लाभ प्रदान करता है।  यदि नेटवर्क विफल हो जाता है, तो एक व्यक्ति अभी भी काम कर सकता है।  एक भी अपनी जरूरतों के अनुरूप सॉफ्टवेयर का चयन कर सकता है। 

एक मामूली प्रारंभिक निवेश के साथ एक वितरित प्रसंस्करण प्रणाली शुरू कर सकता है क्योंकि उसे या केवल दो या तीन वर्कस्टेशन की आवश्यकता होती है और, यदि वांछित है, तो एक केंद्रीय फ़ाइल सर्वर पर कार्य हो सकते है।

 

Network operating system :- नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम को NOS (network operating system) के नाम से भी जाना जाता हैं जो एक प्रकार का कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम है जो किसी नेटवर्क पर विभिन्न प्रकार के autonomous computer (स्वायत्त कंप्यूटरों) को एक दूसरे से जोड़ने तथा संचार करने की सुविधा प्रदान करता है।  एक autonomous computer पूर्ण रूप से  स्वतंत्र कंप्यूटर है जिसकी खुद की main मेमोरी, हार्डवेयर और O.S होती है. 

यह सिंगल यूजर के लिए सिस्टम को संचालन और प्रसंस्करण करने में सक्षम है।  नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम  कंप्यूटरों के बीच में संसाधनों (resource) और स्मृति को साझा करने की सुविधा प्रदान करता है जैसे फाइल, प्रिंटर, कंप्यूटर प्रोग्राम इत्यादि। अगर दूसरे शब्दों में कहें तो नेटवर्क os कई सारे जरूरतों को एक नेटवर्क पर फाइलों तथा संसाधनों को साझा करने की अनुमति देता है।

नेटवर्क O.S का उपयोग करने का एक बड़ा महत्व है।  रिमोट एक्सेस है। रिमोट एक्सेस की मदद से किसी एक कंप्यूटर से ही दूसरे कंप्यूटर की file को access करने की सुविधा प्रदान करता है।  यह एक कार्य केंद्र को दूसरे कार्य केंद्र से सुरक्षित तरीके से जुड़ने और संवाद करने की सुविधा प्रदान करता है।

 

Network os दो प्रकार के होते है:-

 

Peer to peer operating system :

Peer to peer NOS में दो या दो से अधिक computers एक दूसरे से जुड़े(connected) होते है। जो एक दूसरे के साथ फाइल ट्रांसफर तथा resources को साझा करने में सक्षम होते है। हालांकि इस नेटवर्क में सर्वर नहीं होता है। इसमें सारे computers पूर्ण रूप से स्वतंत्र होते है, यही वजह है की ये कंप्यूटर दूसरे कंप्यूटर को स्वतंत्र रूप से फाइल तथा devices को साझा कर सकते है। Peer to peer NOS मुख्य रूप से छोटे स्थानीय क्षेत्र (local area network) के लिए डिजाइन किया गया है।

 

Client server operating system :-

Client server NOS  को एक या एक से अधिक समर्पित फ़ाइल सर्वरों में कार्यों और अनुप्रयोगों को केंद्रीकृत करने की अनुमति देता है।  फ़ाइल सर्वर सिस्टम का दिल बन जाते हैं, संसाधनों तक पहुंच प्रदान करते हैं और सुरक्षा प्रदान करते हैं।  अलग-अलग वर्कस्टेशन (क्लाइंट) की फ़ाइल सर्वर पर उपलब्ध संसाधनों तक पहुंच होती है।  नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम नेटवर्क के सभी घटकों को एकीकृत करने के लिए तंत्र प्रदान करता है और कई उपयोगकर्ताओं को एक ही साथ भौतिक स्थान के बावजूद समान संसाधनों को साझा करने की अनुमति देता है।  UNIX / Linux और Windows सर्वर के Microsoft परिवार क्लाइंट / सर्वर नेटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम के उदाहरण हैं।

 

ऑपरेटिंग सिस्टम का इतिहास

 

  • सन् 1950 में पहली बार ऑपरेटिंग सिस्टम को टेप भंडारण के प्रबंधन के लिए बनाया गया था।

 

  • सन् 1950 की शुरुआत में जनरल मोटर्स रिसर्च लैब के द्वारा IBM 701 के लिए पहला ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) बनाया।

 

  • सन्  1960 के मध्य में ऑपरेटिंग सिस्टम ने डिस्क का उपयोग करना शुरू कर दिया।  

 

  • सन् 1960 के बीच में ही  unix ऑपरेटिंग सिस्टम का पहला संस्करण विकसित किया गया।

 

  • सन् 1981 में Microsoft द्वारा पहला ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया, जिसे DOS के नाम से जाना जाता है। और इसे सिएटल कंपनी से 86-DOS software खरीदकर बनाया गया था।

 

  • वर्तमान का सबसे लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) windows है जो सन् 1985 में पहली बार अस्तित्व में आया।

 

 

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या करता है?

  • Process Management

  • Process Synchronization

  • Memory Management

  • CPU Scheduling

  • File Management

  • Security

 

 

 

 

 

 

 

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